संपादक कुंज कुमार रात्रे
महासमुंद: जिला कांग्रेस कमेटी महासमुंद के तत्वावधान में आज स्थानीय कांग्रेस भवन में देश के कद्दावर नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री शहीद पंडित विद्याचरण शुक्ल की पुण्यतिथि के अवसर पर एक गरिमामय श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पंडित विद्याचरण शुक्ल के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके महान राजनीतिक जीवन, राष्ट्र निर्माण और छत्तीसगढ़ राज्य के गठन में उनके ऐतिहासिक योगदान को विस्तार से याद किया।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित प्रमुख नेताओं के उद्बोधन का विस्तृत विवरण निम्नानुसार है:
• देशव्यापी नेता के रूप में छत्तीसगढ़ को दिलाई पहचान: द्वारकाधीश यादव (जिलाध्यक्ष)
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष द्वारकाधीश यादव ने कहा कि पंडित विद्याचरण शुक्ल किसी एक क्षेत्र के नहीं, बल्कि पूरे देश के सर्वमान्य नेता थे। उनका राजनीतिक कद बेहद ऊंचा था। यादव ने कहा, “विद्याभैया ने राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। जब इस अंचल को लोग ठीक से पहचानते भी नहीं थे, तब उन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता और दूरदर्शिता से दिल्ली के गलियारों में छत्तीसगढ़ की एक विशिष्ट पहचान स्थापित की। उनका पूरा जीवन राष्ट्र और संगठन की सेवा में समर्पित रहा। उनका असमय जाना हमारे लिए एक ऐसी क्षति है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता।”
महासमुंद की वैश्विक पहचान थे विद्याभैया: विनोद सेवालाल चंद्राकर (पूर्व विधायक)
पूर्व विधायक विनोद सेवालाल चंद्राकर ने शुक्ल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें महासमुंद का गौरव बताया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा, “यदि आज महासमुंद को देश और दुनिया के राजनीतिक मानचित्र पर जाना जाता है, तो इसका पूरा श्रेय पंडित विद्याचरण शुक्ल जी को जाता है। वह महासमुंद की असली पहचान थे। उन्होंने इस क्षेत्र के विकास के लिए जो नीतियां बनाईं और जो कार्य किए, उसी की बदौलत आज हमारा जिला प्रगति की राह पर है। महासमुंद की जनता के दिल में उनके प्रति जो सम्मान है, वह हमेशा अमर रहेगा।”
• महासमुंद की मिट्टी से था गहरा जुड़ाव, सर्वाधिक बार बने सांसद: गुरमीत चावला (शहर अध्यक्ष)
शहर कांग्रेस अध्यक्ष गुरमीत चावला ने पंडित विद्याचरण शुक्ल के संसदीय सफर और महासमुंद की जनता के साथ उनके अटूट रिश्ते पर प्रकाश डाला। चावला ने कहा, “विद्याभैया हमारे इस अंचल के सर्वोच्च नेता थे। महासमुंद की माटी से उनका ऐसा अद्वितीय लगाव था कि यहाँ की जनता ने उन्हें रिकॉर्ड बार चुनकर देश की सबसे बड़ी पंचायत (लोकसभा) में भेजा। उन्होंने केंद्र सरकार में रहते हुए कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला, लेकिन उनका दिल हमेशा महासमुंद की गलियों और यहां के गरीब-किसानों के लिए धड़कता था। उनका चुनाव लड़ने का तरीका और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद आज के नेताओं के लिए एक मार्गदर्शिका है।”
• छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के संघर्ष के रहे मार्गदर्शक: संजय शर्मा (जिला उपाध्यक्ष)
जिला उपाध्यक्ष संजय शर्मा ने पंडित विद्याचरण शुक्ल के साथ बिताए गए अपने पुराने दिनों को याद करते हुए भावुक क्षण साझा किए। उन्होंने कहा, “मुझे विद्याभैया के संरक्षण में काम करने का सौभाग्य मिला। वह जितने कड़े प्रशासक थे, कार्यकर्ताओं के लिए उतने ही सरल और सहज थे। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के आंदोलन में उनका संघर्ष और मार्गदर्शन अतुलनीय था। उन्होंने नए राज्य की परिकल्पना को साकार करने के लिए अंतिम समय तक लड़ाई लड़ी। उनके साथ काम करते हुए हमने जो अनुभव प्राप्त किए, वही आज हमारी राजनीतिक पूंजी हैं। उनके दिखाए रास्ते पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
कार्यकर्ताओं ने लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर शहीद पंडित विद्याचरण शुक्ल की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी कांग्रेस जनों ने शुक्ल जी के सिद्धांतों और उनके जन-कल्याणकारी विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर द्वारकाधीश यादव जिलाध्यक्ष एवं विधायक खल्लारी, गुरमीत चावला अध्यक्ष शहर कांग्रेस कमेटी, विनोद चंद्राकर पूर्व विधायक, लक्ष्मण पटेल जिला प्रभारी महामंत्री, संजय शर्मा जिला उपाध्यक्ष, दाऊलाल चंद्राकर, मनोजकांत साहू, खिलावन बघेल शहर मंडल अध्यक्ष, निर्मल जैन शहर महामंत्री, भूपेंद्र ठाकुर जिला उपाध्यक्ष, गणेश शर्मा, विजय बंजारे, सोमेश दवे, भारत ठाकुर, जसबीर ढिल्लों, तुलसी साहू, देवेश शर्मा, ढेलू निषाद, प्रदीप चंद्राकर, नितेंद्र बैनर्जी, अमन चंद्राकर, हार्दिक सोना, तबरेज खान, राशि महिलांग, सोनम बांसोड़, डॉ एजाज नकवी, हर्षित चंद्राकर, अनीश रजवानी, मनोहर ठाकुर, खोम सिन्हा, प्रकाश अजमानी, बसंत चंद्राकर, टोमन सिंह कागजी, शहजान पाशा, खोमेश साहू, अनुराग चंद्राकर, हेमसिंह नायक, भोलेनाथ गंधर्व, लीलू साहू, सुरेंद्र ठाकुर, गुलशन साहू, मोइन कुरैशी, परमानंद साहू, प्रहलाद ध्रुव, वेद प्रकाश साहू, छोटेलाल, तुलसीदास भानु सोनी, सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे।