संपादक कुंज कुमार रात्रे
महासमुंद। छत्तीसगढ़ जीव जंतु कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष व कांग्रेस के प्रदेश संयुक्त महामंत्री आलोक चंद्राकर ने नीट पेपर लीक मामले में केंद्र की मोदी सरकार की नाकामी के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्र-छात्राओं पर जिस प्रकार बर्बर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस के गोले दागे गए और उन पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं, उसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हुये कहा कि यह घटना न केवल लोकतंत्र पर हमला है बल्कि देश के नौजवानों और बेटियों के भविष्य तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास है। जब लाखों छात्र और छात्राएं अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरकर न्याय मांग रहे थे, तब केंद्र सरकार और उसके इशारे पर काम करने वाले तंत्र ने संवाद की जगह दमन को चुना। पेपर लीक के कारण पूरे देश में परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता समाप्त हो गई है। करोड़ों परिवारों ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लिए, कोचिंग की फीस भरी और रात-दिन मेहनत की, लेकिन सरकार की लापरवाही के कारण सब कुछ दांव पर लग गया। ऐसे में छात्र-छात्राओं का शांतिपूर्ण विरोध करना उनका संवैधानिक अधिकार था। उन पर लाठी बरसाना और आंसू गैस छोड़ना यह दर्शाता है कि मोदी सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अब छात्रों की आवाज को भी दबाना चाहती है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि इससे भी ज्यादा शर्मनाक यह है कि पीड़ित छात्र-छात्राओं के खिलाफ ही आपराधिक एफआईआर दर्ज की गई है। यह तानाशाही रवैया किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पर तत्काल सभी झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं, घायल छात्र-छात्राओं को उचित इलाज और मुआवजा दिया जाए तथा इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जब छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है तो जवाबदेही किसकी है। शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। संविधान में इस बात का स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए कि यदि कोई मंत्री या सचिव शिक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था को ध्वस्त करे तो उसे तत्काल बर्खास्त किया जा सके। छात्रों के सपनों से खेलने वालों को अब बचना नहीं चाहिए। हम सभी को छात्र-छात्राओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना होगा और जब तक न्याय नहीं मिलता तब तक इस लड़ाई को जारी रखना होगा !!