संपादक कुंज कुमार रात्रे
महासमुंद। जिला पंचायत के पूर्व सभापति अमर अरुण चंद्राकर ने कहा कि महासमुंद विधानसभा क्षेत्र में स्वेच्छानुदान राशि के वितरण में सामने आई गड़बड़ी ने भारतीय जनता पार्टी की साय सरकार के तमाम दावों की पोल खोल दी है। सत्ता में आने से पहले भाजपा ने जनता से वादा किया था कि उनकी सरकार में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और सुशासन की नई मिसाल कायम की जाएगी। लेकिन आज महासमुंद में जो हुआ है, उससे स्पष्ट है कि भाजपा के सारे दावे खोखले साबित हुए हैं और सुशासन की धज्जियां उड़ गई हैं। गरीब, बीमार, विधवा और दिव्यांगों के लिए स्वीकृत की गई स्वेच्छानुदान राशि को हकदारों तक पहुंचाने के बजाय उसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों और सत्ता के करीबी परिवारों में बांट दिया गया। यह सीधे-सीधे जरूरतमंद के हिस्से पर डाका है और भाजपा सरकार की कथनी और करनी के बीच का अंतर उजागर करता है।
अमर ने कहा कि दुर्भाग्य की बात यह है कि इस भ्रष्टाचार में केवल छोटे स्तर के लोग शामिल नहीं हैं। भाजपा के मंत्री से लेकर विधायक और संगठन के पदाधिकारी तक इस गोरखधंधे में लिप्त नजर आ रहे हैं। स्वेच्छानुदान जैसी संवेदनशील योजना को भी चुनावी लाभ और चहेतों को साधने के औजार के रूप में इस्तेमाल किया गया। यदि भाजपा को वास्तव में स्वेच्छानुदान देना ही था तो उसे अपने उन जमीनी कार्यकर्ताओं को देना चाहिए था जो वर्षों से पार्टी का झंडा उठाते आए हैं। गांव-गांव में ऐसे हजारों भाजपा कार्यकर्ता हैं जो बेहद गरीब और जरूरतमंद हैं। चुनाव के समय दिन-रात मेहनत करके पार्टी को जिताने वाले ये कार्यकर्ता आज भी दैनिक जीवन में संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन सत्ता मिलते ही भाजपा ने इन निष्ठावान कार्यकर्ताओं की पूरी तरह उपेक्षा कर दी है। चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि अब उन्हीं कार्यकर्ताओं को पहचानने से भी इनकार कर रहे हैं। जिनके दम पर वे चुनाव लड़े और जीते। अमर ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और स्वेच्छानुदान की राशि सही मायने में जरूरतमंद हितग्राहियों तक पहुंचे।