संपादक कुंज कुमार रात्रे
महासमुंद। जिला पंचायत सदस्य सृष्टि अमर चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 17-क(1) के तहत 7 अगस्त को कलेक्ट्रेट सभागार में सिरपुर विकास योजना समिति की बैठक बुलाई गई है। यह बैठक केवल कागजों पर योजना बनाने के लिए नहीं, बल्कि सिरपुर क्षेत्र के भविष्य को बेचने की साजिश रचने के लिए बुलाई गई है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इस महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र के निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य और जनपद सदस्यों को जानबूझकर आमंत्रित ही नहीं किया गया। जो प्रशासनिक तानाशाही को दर्शाता है। जब से छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनी है तब से जिला प्रशासन द्वारा लगातार कांग्रेस समर्थित चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अपमानित करने का सिलसिला चल रहा है। साडा के अधिकारी और नगर निवेश के अधिकारियों की सांठगांठ से सिरपुर क्षेत्र को बेचने का पूरा प्लान तैयार किया जा चुका है।
श्रीमती चंद्राकर ने कहा कि सिरपुर विकास प्राधिकरण साडा का गठन 2016 में हुआ था। गठन के बाद पंचायतों पर नए-नए नियम लाद दिए गए, लेकिन आज तक साडा क्षेत्र के 34 गाँवों में एक रुपए का भी विकास कार्य नहीं कराया गया। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय सिरपुर विकास प्राधिकरण को 5 करोड़ रुपए दिए गए थे। उसका आज तक कोई हिसाब नहीं है। वह पैसा कहां गया, किस पर खर्च हुआ, किसी को पता नहीं। वहीं पूर्व में मंत्रिमंडल के निर्णय के नाम पर सिरपुर क्षेत्र के 6 गाँवों की जमीन एक रुपए लीज पर बड़े व्यवसायियों को दे दी गई। उस समय यह तय नहीं किया गया कि जमीन देने के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों को क्या लाभ मिलेगा। आज भी इसकी कोई जानकारी नहीं है। अब नगर निवेश के नाम पर मनमानी चरम पर है। ऐसे गाँवों को नगर निवेश क्षेत्र में शामिल कर लिया गया जो उसके दायरे में आते ही नहीं। भौगोलिक अध्ययन किए बिना, सरपंचों और जनप्रतिनिधियों से बिना पूछे, बिना सहमति लिए अपने मन मुताबिक गाँव जोड़े जा रहे हैं। यदि शामिल करना ही था तो पहले यह बताना चाहिए था कि मास्टर प्लान क्या है, कौन से विकास कार्य होंगे और फंड की क्या स्थिति होगी। लेकिन साडा का सीईओ पूरी तरह मनमानी कर रहा है। पूर्व में सिरपुर महोत्सव में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, उसकी न जांच हुई न कार्रवाई। आज भी नियम विरुद्ध अनेक रिसोर्ट को साडा द्वारा एनओसी दी जा रही है जबकि बिना अनुमति इस क्षेत्र में ऐसा कोई संचालन नहीं हो सकता। यह भी जानकारी मिल रही है कि नकटी गाँव की तर्ज पर अब सिरपुर क्षेत्र का व्यवस्थापन करने की तैयारी है। यानी सिरपुर को उजाड़ने की साजिश है।
धसकुड़ जलप्रपात में आए दिन हादसे और संदिग्ध मौतें हो रही हैं, स्कूलों में शिक्षक नहीं, स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर नहीं, लेकिन विकास की बात करने के बजाय जमीन बेचने की बात हो रही है। शासन ने बजट में सिरपुर के लिए कई प्रस्ताव रखे थे, पहले उन्हें पूरा किया जाए। सुखद है कि साडा कार्यालय आज तक नहीं खुल सका। किसी समस्या या शिकायत लेकर क्षेत्रवासी कहा जाए नहीं। जानते, पूर्व में नगर निवेश क्षेत्र में जिन गांवों को शामिल किया गया उनके पंचायत प्रस्ताव भी नहीं लिए गए। उन गांवों को पूछा तक नहीं गया कि क्या आप शामिल होना चाहते हैं या नहीं। सांसद रूपकुमारी चौधरी व कलेक्टर द्वारा इस पर संज्ञान लिया गया था। सांसद ने ग्राम समिति व पंचायतों से सहमति पत्र लेने की बात कही थी। लेकिन, उनकी बातों को भी नजर अंदाज किया गया। सिरपुर में प्रतिवर्ष सावन में हजारों बोलबम कावर यात्री आते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा का भी पुख्ता इंतजाम नहीं होते।
सुशासन तिहार से पहले लोगों को जानकारी क्यों नहीं दी गई ताकि आपत्ति दर्ज हो सके।
सृष्टि ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की गोपनीय बैठक और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा स्वीकार नहीं की जाएगी। साडा और नगर निवेश द्वारा पंचायतों के अधिकारों का हनन बंद किया जाए। अन्यथा क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
