संपादक कुंज कुमार रात्रे
महासमुंद। छत्तीसगढ़ जीव जंतु कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष व कांग्रेस के प्रदेश संयुक्त महामंत्री आलोक चन्द्राकार ने संसद के पवित्र मकरद्वार पर पूर्व शिक्षा मंत्री का बाजे-गाजे के साथ स्वागत किए जाने की कृत्य का निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र का मजाक और 28 करोड़ छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि पिछले दो वर्षों में पूरा देश देख रहा है कि एक तरफ नीट, सीयूईटी और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में पेपर लीक की बाढ़ आ गई। दूसरी तरफ सड़कों पर अपने हक के लिए उतरे छात्रों पर लाठियां और जेल की कार्रवाई की गई। बिहार से लेकर राजस्थान तक, बच्चों के हाथ में किताब की जगह हथकड़ी आई। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी आज एक उद्योग बन चुकी है। जहां गरीब मेहनती छात्र फेल हो जाते हैं और सिस्टम के दलाल पास हो जाते हैं। और जब जिम्मेदारी तय करने का समय आया, तो सरकार ने जांच नहीं की, निलंबन नहीं किया। उल्टे उसी सिस्टम के सबसे बड़े संरक्षक का संसद में ढोल-नगाड़ों से स्वागत कर दिया। यह स्वागत नहीं है। यह उन माताओं के आंसुओं का अपमान है जिनके बच्चे रात-रात भर पढ़कर भी सिस्टम की साजिश का शिकार हुए। यह उन शिक्षकों का अपमान है जो ईमानदारी से पढ़ाते हैं।
आलोक ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार यह को यह समझ लेना चाहिए कि शिक्षा कोई इवेंट मैनेजमेंट नहीं है। यहां फेल होने पर दोबारा परीक्षा होती है, दोबारा सरकार नहीं बनती। केंद्र सरकार ने एनटीए को ढाल बना कर अपनी नाकामियों को छिपाया है। छात्रों की पीड़ा को कानून व्यवस्था का मुद्दा बना कर दबाया है, जिसे देश कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने मांग की है कि पेपर लीक के सभी मामलों की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से जांच हो। एनटीए को भंग कर एक पारदर्शी, राज्य भागीदारी वाली नई परीक्षा संस्था बनाई जाए। छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज हो और पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिले। शिक्षा बेचने वालों का स्वागत और पढ़ने वालों पर लाठी। यह नया भारत नहीं, यह टूटते भारत की तस्वीर है।
