रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे
महासमुंद। जिला मुख्यालय के नजदीकी ग्राम खैरा में छत्तीसगढ़ का पारंपरिक छेरछेरा पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। छेरछेरा, कोठी के धान ल हेरते हेरा के जयघोष के साथ पूरा गांव उत्सव के रंग में डूबा नजर आया। सुबह से ही बच्चों की टोलियां हाथों में थैले और टोकरियां लेकर घर-घर पहुंचने लगे। बच्चों के साथ-साथ युवाओं और बुजुर्गो में भी इस पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा गया। ग्रामीणों ने अपनी परंपरा का निर्वहन करते हुए अन्न धान एवं चावल अपने सामर्थ्य अनुसार दान दिया। मान्यता है कि इस दिन दान देने से घर में सुख-समृद्धि आती है और भंडार भरे रहते हैं। गांव की गलियों में डफली और मांदर की थाप पर लोक गीतों की गूंज सुनाई दी। खैरा में यह पर्व आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता के प्रतीक के रूप में मनाया गया। फसल कटाई के बाद खुशी मनाने का यह पारंपरिक तरीका आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े हुए है। शाम तक गांव के प्रत्येक घर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।