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आन्तरिक पवित्रता, आत्मिक परिवर्तन, और मनोविकारों का दहन का प्रतीक पर्व होली

रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे महासमुन्द आन्तरिक पवित्रता, आत्मिक परिवर्तन, और मनोविकारों का दहन का प्रतीक पर्व होली ब्रम्हाकुमारीज के स्थानीय सेवाकेंद्र उपकार भवन में बहुत ही उमंग के साथ मनाया गया, ईश्वरीय परिवार के सभी सदस्य एकत्रित हो कर गीत संगीत के साथ होली पर्व मनाया, ब्रम्हा कुमारी बहनों ने सभी आए हुए अतिथियों के उपर फूलों की वर्षा करते हुए अलौकिक रीति की होली मनाईं, सेवाकेंद्र संचालिका ब्रम्हा कुमारी प्रीती दीदी ने सभी को आत्म स्मृति का  तिलक लगाकर बधाई शुभकामनाए दी, छोटे छोटे बच्चों ने नृत्य संगीत के माध्यम से दर्शकों का मन मोह लिया, प्रिती दीदी ने होली पर्व के आध्यात्मिक रहस्य खोलते हुए कहा , होली पर्व केवल रंगों का खेल नहीं बल्कि आंतरिक बुराईयों काम, क्रोध,लोभ,मोह, अहंकार को योग की अग्नि में जलाकर पवित्र बनने का आध्यात्मिक पर्व है यह स्वयं को परमात्मा के प्रेम के गुणों के रंगों से सराबोर कर दिव्य गुणों को धारण करने का शुभ अवसर है , लकड़ियां जलाना अर्थात मन की विकृतियों और पुरानी आदतों को ज्ञान की अग्नि में भस्म करने का प्रतीक है , प्रहलाद परमात्मा के प्रिय वत्स का प्रतीक है जो विकारों की आग में भी अटल रहते और भगवान की याद से सुरक्षित रहते ,शांति प्रेम सुख आनंद शक्तियां  ईश्वरीय रंगों का प्रतीक है , दीदी ने होली शब्द का अर्थ बताता होली अर्थात बिछी हुई बातों का सिमरन ना किया जाए तो जीवन में सदा सुख शांति बनी रहेगी

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