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गुरुमाता मिनीमाता जी का राजनीतिक जीवन और सेवा कार्य

गुरुमाता मिनीमाता जी का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे महासमुन्द नाम , मीनाक्षी देवी (मिनीमाता) जन्म स्थान – दोलगांव, असम जनता द्वारा प्रदान नाम – गुरुमाता  जन्म दिनाँक – 13 मार्च 1913

पिता – महंत बुधारीदास

माता – देवमती बाई

पति – गुरु अगमदास जी

कार्य क्षेत्र – सांसद, रजनीति एवं सेवा क्षेत्र

निधन – 11 अगस्त 1972

गुरुमाता मिनीमाता जी का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

गुरुमाता मिनी माता जी का जन्म असम में 1913 को नवांगांव जिले के ग्राम दोलगांव (जमुनामुख) में हुआ इनका मूल नाम मीनाक्षी ओर माता का नाम मतीबाई था। अकाल की स्थिति में पलायन कर मिनीमाता के दादा जीविकोपार्जन के लिए छत्तीसगढ़ के मुंगेली ग्राम सगुना असम के चाय बागान दौलतपुर में विस्थापित हो गए।

गुरुमाता जी की सातवीं कक्षा तथा प्राइमरी तक स्कूल तक शिक्षा असम में ही हुई इसके बाद मैट्रिक तक की शिक्षा उन्होंने छत्तीसगढ़ से ग्रहण की। उन्हें हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला छत्तीसगढ़ी भाषा का बहुत ही अच्छा ज्ञान था। छत्तीसगढ़ से समाज के प्रति लोगों का हाल-चाल जानने के लिए समाज के धर्मगुरु असम के चाय बागान जाया करते थे ऐसे ही एक समय तत्कालीन गुरु अगमदास जी दौलतपुर पहुंचे जिनकी कोई भी संतान नहीं थी। और महंत ने उनसे पुनः विवाह करने का आग्रह किया था वही महंत बुधारी दास की कन्या मीनाक्षी का विवाह 1932 में गुरु अगमदास जी से हुआ और इस तरह से साधारण परिवार में जन्मी एक कन्या, गुरु पत्नी अर्थात माता पद को प्राप्त हुई इसके बाद माता जी गुरु के साथ छत्तीसगढ़ वापस आ गईं।

गुरुमाता मिनीमाता जी का राजनीतिक जीवन और सेवा कार्य

1952 उपचुनाव जीतकर में सर्वप्रथम महिला सांसद बनने का गर्व प्राप्त हुआ।

1955 को पुनः सांसद बनी।

1957 में संयुक्त संसदीय क्षेत्र रायपुर,बिलासपुर और दुर्ग से जीतकर सांसद बनी।

1962 में बलौदाबाजार क्षेत्र से 52 फीसदी ज्यादा मतों से जीतकर दिल्ली में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व की।

1967 में जांजगीर संसदीय क्षेत्र से पिछले बार से ज्यादा मत प्रतिशत के साथ जीतकर सांसद में अपना दमदार प्रतिनिधित्व का लोहा मनवाई।

गुरु अगमदास जी राष्ट्रीय कांग्रेस में पदाधिकारी थे माता जी उनके हर दौर में उनके साथ होती थी। गुरु अगमदास जी संविधान सभा के सदस्य भी थे। गुरु का निधन 1952 में हो गया तब माता जी संसद की सदस्य थीं। पंडित रविशंकर शुक्ल के रहते उनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन से मध्यावधि चुनाव के समय मिनीमाता जी रायपुर से सांसद चुनी गई पंडित जवाहरलाल नेहरू और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और पंडित रविशंकर जैसे नेता उनका बड़ा सम्मान करते थे।

गुरु माता मिनीमाता जी भारतीय दलित वर्ग संघ की उपाध्यक्ष भी थीं उन्होंने छत्तीसगढ़ मजदूर संघ का गठन किया था। माता जी एक कर्मठ महिला थी। उन्होंने बाल विवाह, दहेज, छुआछूत, गोवध आदि का विरोध किया। अस्पृश्यता निवारण विधेयक को संसद में प्रस्तुत करवाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सन 1972 में 11 अगस्त की अर्धरात्रि में जब मिनीमाता भोपाल से दिल्ली जा रही थी तब एक प्लेन दुर्घटना में उनका दुखद निधन हो गया।

छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा मिनीमाता के नाम पर कुछ सुविधा संचालित की जाती हैं जैसे

● उनके नाम पर छत्तीसगढ़ विधानसभा का नाम मिनीमाता नाम पर है (वर्तमान में जाति वादी सरकार ने नाम हटा दिया है, यह बहुत ही शर्म की बात है..)

● महिलाओं के उत्थान के लिए प्रति वर्ष राज्य अलंकरण पुरस्कार का वितरण छत्तीसगढ़ में सेवारत महिलाओं के लिए मिनीमाता महिला उत्थान सेवा पुरस्कार के रूप में किया जाता है।

मिनीमाता के द्वारा समाज के लिए किए गए कुछ कार्य

● पिछड़ापन छुआछूत गरीबी अशिक्षा को समाज से दूर करने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन इंडियन कार्यों में लगा दिया था।

● मजदूरों के उत्थान नारी शिक्षा के साथ काम करने के साथ ही दहेज प्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों उन्होंने सांसद तक आवाज उठाई थी।

● कृषि तथा सिंचाई के लिए छत्तीसगढ़ में हसदेव बांध परियोजना भी उन्हीं की दूर-दृष्टि का परिणाम है।

● भिलाई इस्पात संयंत्र में लोगों को प्रशिक्षण और रोजगार कराने की दिशा में भी उन्हें याद किया जाता है

● महिलाओं के साथ-साथ उनके बाल कल्याण के लिए योगदान अत्यंत सराहनीय था।

● ग्रामीणों को स्वच्छता का सन्देश उनका सहयोग ग्रामीणों के विकास के लिए एक अहम् योगदान था।

● शारीरिक रूप से विकलांग और गरीबों के विकास में मीनाक्षी देवी का योगदान सर्वोपरिय था।

● समाज में व्याप्त अस्पृश्यता नामक राक्षस से लड़ने में उन्होंने सबसे अधिक योगदान दिया।

● छत्तीसगढ़ राज्य बनाने में माता जी भी सम्मिलित थी, गुरु अगमदास जी , डॉ खूबचंद बघेल जी व छत्तीसगढ़िया सपूतों के साथ।

 

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