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शारीरिक आरोग्यता के लिए योग जरूरी

संपादक कुंज कुमार रात्रे महासमुंद दिनांक 18 जून 2026 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत, डॉ आई नागेश्वर राव मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ बी महेश्वरी संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक, श्री मती नीलू घृतलहरे डीपीएम, डॉ सी पी चंद्राकर नोडल अधिकारी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के समन्वय से कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला जेल महासमुंद में बंदियों को ‘मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम’ के अंतर्गत महत्वपूर्ण मनोसामाजिक परामर्श (Psychosocial Counselling) भी प्रदान किया गया। शारीरिक आरोग्यता के लिए योग और मानसिक सुदृढ़ता के लिए विशेषज्ञों द्वारा दी गई व्यक्तिगत काउंसलिंग के इस दोहरे समन्वय से बंदियों को अवसाद से उबरने में बड़ी मदद मिली। 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के इस विशेष अवसर पर योग अभ्यास के साथ-साथ उनके महत्व पर प्रकाश डाला गया। जिला जेल महासमुंद में आज 21 जून ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के सुअवसर पर बंदियों के संपूर्ण कल्याण के लिए एक वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में बंदियों को जहां एक ओर योग प्रशिक्षकों द्वारा योग के गुर सिखाए गए, वहीं दूसरी ओर ‘राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम’ के तहत विशेषज्ञों द्वारा मनोसामाजिक परामर्श (Psychosocial Counselling) भी दिया गया।
योग प्रशिक्षकों द्वारा स्वास्थ्य संवर्धन
शिविर में पहुंचे योग प्रशिक्षकों ने बंदियों को नियमित योग करने के लाभ समझाए। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को लचीला बनाने के लिए नहीं, बल्कि मन को शांत रखने का विज्ञान है।
आसनों का अभ्यास: बंदियों को ताड़ासन, शशांकासन और भुजंगासन जैसे आसनों का प्रायोगिक अभ्यास कराया गया।
प्राणायाम का महत्व: मानसिक तनाव, चिंता और अनचाहे विचारों को नियंत्रित करने के लिए अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भ्रामरी प्राणायाम का विशेष सत्र आयोजित किया गया।
विशेषज्ञों द्वारा मनोसामाजिक परामर्श (Psychosocial Counselling)
योग सत्र के उपरांत, जिला चिकित्सालय के ‘मन कक्ष’ से आए क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर्स की टीम द्वारा बंदियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सत्र का संचालन किया गया:
मानसिक तनाव की पहचान: मनोवैज्ञानिकों ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि जेल की सीमित दुनिया में एकाकीपन और अवसाद होना स्वाभाविक है, लेकिन इसे मनोसामाजिक परामर्श और सकारात्मक सोच से ठीक किया जा सकता है।
व्यक्तिगत और सामूहिक काउंसलिंग: शिविर में बंदियों की सामूहिक काउंसलिंग के साथ-साथ उन बंदियों की व्यक्तिगत (वन-टू-वन) काउंसलिंग भी की गई जो लंबे समय से अनिद्रा, अत्यधिक चिंता या घर-परिवार की याद में गहरे अवसाद से जूझ रहे थे।
भावनात्मक संबल: विशेषज्ञों ने बंदियों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने, नकारात्मकता को छोड़ने और भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज में लौटने के लिए प्रेरित किया। जेल अधीक्षक सुश्री अश्वनी पूजा तिर्की, श्री उदय कुमार गायकवाड़ सहायक अधिक्षक ने इस दोहरे आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि योग और मनोसामाजिक परामर्श का यह अनूठा संगम बंदियों के व्यवहारिक और मानसिक सुधार में मील का पत्थर साबित होगा। शारीरिक रूप से स्वस्थ शरीर और मानसिक रूप से शांत मन ही बंदियों को अपराध बोध से मुक्त कर आत्म-सुधार की ओर ले जा सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और योग प्रशिक्षकों की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल स्पर्श क्लिनिक मनोरोग विभाग से राम गोपाल खूंटे मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता, श्री खोमन लाल साहू एस एन ओ, श्री देव कुमार डडसेना योग प्रशिक्षक, उपस्थित हुए। कार्यक्रम के अंत में जेल के समस्त स्टाफ, प्रहरियों और उपस्थित 110 बंदियों ने नियमित योग करने और अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया। 10 बंदियों में अत्यधिक मानसिक तनाव देखा गया। जिसको मनोसामाजिक परामर्श दिया गया।

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