Blogछत्तीसगढ़

सहकार भवन में नियुक्ति और प्रमाणपत्रों पर उठे सवाल: जांच में देरी से बढ़ा विवाद, अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न

रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे महासमुन्द रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित के सहकार भवन मुख्यालय में पदस्थ कर्मचारी जितेन्द्र देवांगन के शैक्षणिक योग्यता एवं अन्य अर्हता प्रमाणपत्रों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में की गई शिकायत के बाद अब जांच प्रक्रिया में हो रही देरी और कार्रवाई नहीं होने को लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार, जितेन्द्र देवांगन पिता सत्यनारायण देवांगन के शैक्षणिक एवं अन्य अर्हता प्रमाणपत्रों की सत्यता को लेकर सहकार भवन मुख्यालय में शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत को गंभीर मानते हुए छत्तीसगढ़ state सहकारी बैंक मर्यादित के प्रबंध संचालक द्वारा 24 दिसंबर 2025 को संबंधित अधिकारी को लिखित निर्देश जारी कर सात दिवस के भीतर जांच कर तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने कहा गया था।

हालांकि, शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद अब तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही संबंधित कर्मचारी पर कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने आई है। यही वजह है कि अब पूरे मामले में प्रशासनिक निष्क्रियता और संभावित संरक्षण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

शिकायतकर्ता ने उठाए कई गंभीर सवाल

मामले को लेकर शिकायतकर्ता द्वारा पांच प्रमुख सवाल उठाए गए हैं, जिनमें जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सीधे प्रश्न खड़े किए गए हैं।

शिकायतकर्ता ने पूछा है कि जब प्रबंध संचालक द्वारा सात दिवस के भीतर जांच पूरी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, तो अब तक जांच में क्या कार्रवाई हुई और जांच में क्या तथ्य सामने आए?

इसके साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि आखिर जांच में इतनी देरी क्यों हुई। चार महीने बीत जाने के बावजूद संबंधित कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं होना कई आशंकाओं को जन्म दे रहा है।

शिकायतकर्ता ने यह आशंका भी व्यक्त की है कि कहीं जांच में जानबूझकर देरी कर जितेन्द्र देवांगन को कार्रवाई से बचाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है।

मामले में आगे यह भी पूछा गया है कि यदि जांच में कर्मचारी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध विभाग द्वारा क्या वैधानिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठी उंगलियां

पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उच्च अधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद समय पर जांच पूरी नहीं करना एक जिम्मेदार लोकसेवक के कर्तव्यों के निर्वहन पर सवाल खड़ा करता है।

प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि किसी शिकायत की जांच समयबद्ध तरीके से नहीं होती, तो इससे विभाग की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और आम नागरिकों के मन में निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा होता है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी का बड़ा बयान

इस विषय पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी, जांच के बाद ही निराकरण होगा” — मुख्य कार्यपालन अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित

मामले को लेकर जब छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित की मुख्य कार्यपालन अधिकारी से चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि इस पूरे विषय पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही मामले का अंतिम निराकरण किया जाएगा।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी के इस बयान के बाद अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

पारदर्शिता की मांग तेज

अब शिकायतकर्ता एवं संबंधित पक्ष पूरे मामले की निष्पक्ष जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button