रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे महासमुन्द “भाजी तोड़ना दिखावा नहीं… यह मेरी सच्चाई है” 🌱 मेर भाई का सपना
आज जब मैंने अपने किचन गार्डन में आखिरी बार चेंज भाजी की तोड़ाई की, तो मन में एक अलग ही संतोष था। यह सिर्फ भाजी नहीं थी, बल्कि एक महीने की मेहनत, धैर्य और प्रकृति के साथ जुड़ाव का परिणाम था।
करीब एक माह पहले मैंने 5×8 की एक छोटी-सी क्यारी तैयार की। कुदाली और फावड़े से मिट्टी को भुरभुरा बनाया, फिर भाजी के बीज में रेत मिलाकर छिड़काव किया ताकि पौधे बहुत घने न उगें। ग्रीष्म ऋतु को ध्यान में रखते हुए हर तीन दिन में नियमित सिंचाई की। धीरे-धीरे छोटे-छोटे पौधे हरे जीवन में बदल गए… और फिर शुरू हुई तोड़ाई की खुशी।
चार बार भाजी तोड़ने के बाद आज अंतिम तोड़ाई थी। खास बात यह है कि हर बार भाजी मैं खुद ही साफ करता हूँ — बिना किसी के कहे। क्योंकि यह काम मुझे सुकून देता है।
जहाँ लोग रोज़ एक घंटा टहलने या व्यायाम में बिताते हैं, वहीं मैं वही समय अपने किचन गार्डन को देता हूँ। यह मेरे लिए सिर्फ शौक नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ एक जीवंत रिश्ता है।
मैंने जहाँ-जहाँ भी कार्य किया, वहाँ पौधारोपण को हमेशा प्राथमिकता दी। हर वृक्षारोपण अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, क्योंकि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण केवल विकल्प नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है।
👉 संदेश सरल है:
दिखावे से नहीं, सच्चाई से जुड़िए।
प्रकृति के साथ समय बिताइए।
एक छोटा-सा पौधा भी आपके जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
आइए, हम सब मिलकर पर्यावरण के प्रति जागरूक बनें और आने वाली पीढ़ी के लिए एक हराभरा भविष्य तैयार करें 🌿
आपका अपना, भाई महासमुंद