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घर-घर जाकर दान*: बच्चे और ग्रामीण घर-घर जाकर दान मांगते हैं और सामूहिक भोजन का आयोजन करते हैं.

रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे महासमुन्द छत्तीसगढ़ में पुस पूर्णिमा के दिन छेरछेरा पर्व मनाया जाता है, जिसमें लोगों अपने घरों से अन्न दान करते है। अन्नदाता किसान नई फसल की खुशी में के रूप में यह पर्व उत्साह के साथ मनाते हैं। इस पर्व का विशेष महत्व है, क्योंकि इसमें धान के साथ-साथ साग-भाजी, फल और अन्य अन्न का दान किया जाता है, जो आपसी सहयोग, करुणा और मानवता का परिचय देता है.

महासमुंद और आसपास के ग्रामीण अंचलों में भी छेरछेरा अन्ना के महादान का यह पर्व बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। छेरछेरा महादान, सामाजिक समरसता और दानशीलता का प्रतीक है, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध, गौरवशाली और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत परंपरा को सजीव रूप में अभिव्यक्त करता है। छेरछेरा पर्व पर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मड़ाई,मेंलो का आयोजन किया जाता है इस दिन नैसर्गिक प्राकृतिक वनांचल क्षेत्र दलदली में मेले का आयोजन होता है। औद्योगिक क्षेत्र बिरकोनी में चंडी माता के प्रांगण पर भी मेला का आयोजन होता है इसमें लोग उत्साह के साथ सम्मिलित होते हैं।

 

*छेरछेरा पर्व के मुख्य आकर्षण:*

 

– *घर-घर जाकर दान*: बच्चे और ग्रामीण घर-घर जाकर दान मांगते हैं और सामूहिक भोजन का आयोजन करते हैं.

– *धान और रुपये का दान*: लोग अपने घरों से धान और रुपये का दान करते हैं.

– *सामाजिक एकता*: यह पर्व समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और साझा समृद्धि की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है.

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