संपादक कुंज कुमार रात्रे महासमुंद छत्तीसगढ़ 10वीं 12वीं बोर्ड परीक्षा के ही दिन जिला शिक्षा अधिकारी के तुगलकी फरमान से 9 वीं एवं 11वीं की स्थानीय परीक्षा आयोजित किए जाने से दिव्यांग पिता-पुत्र राइटर (लेखक) ना मिलने से आहत कहते हैं कि शिक्षा किसी की मोहताज नहीं होती लेकिन आज उक्त बातें यहां पर चरितार्थ होते-होते रह जाएगी कयोंकि एक दिव्यांग पुत्र के पालक ने अपने दोनों आंखों से दिव्यांग पुत्र की विलक्षण प्रतिभा व उसके उज्जवल भविष्य के प्रति चिंतित होकर उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव साय संबद्ध शिक्षा मंत्री एवं सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर तथा संचालक संचालनालय समाज कल्याण विभाग रायपुर एवं जिला कलेक्टर महासमुंद को अपनी व्यथा प्रकट करते हुए स्थानीय वार्षिक परीक्षा कक्षा 9वी एवं 11वीं को आगामी माह अप्रैल में आयोजित किए जाने की मांग की है।
विदित हो कि नाम न छापने की शर्त पर नेत्र से दिव्यांग पुत्र के पिता एवं उसके दिव्यांग पुत्र ने बताया है कि दोनों आंखों से दिव्यांग होते हुए वर्तमान में वह छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर द्वारा आयोजित कक्षा बारहवीं की वार्षिक परीक्षा, कला संकाय (विषय) से दिला रहा है जो कि आगामी 1 मार्च से 12 वीं की परीक्षा तथा कक्षा दसवीं बोर्ड परीक्षा आगामी 4 मार्च 2025 से प्रारंभ हो रही है।
पिता एवं पुत्र ने अपनी व्यथा प्रकट करते हुए कहा है कि जिस दिन बोर्ड परीक्षा आयोजित की जा रही है ठीक उसी दिन महासमुंद जिला शिक्षा अधिकारी के तुगलकी फरमान द्वारा स्थानीय परीक्षा अर्थात कक्षा 9 वी एवं 11 वीं की परीक्षा आयोजित किए जाने हेतु समय सारणी घोषित कर दी गई है जो कि 1 मार्च से लेकर 28 मार्च तक संचालित हो रही है जिसके कारण नेत्र दृष्टिबाधित दिव्यांग विद्यार्थी समूह काफी आहत है। पिता-पुत्र ने बताया कि कक्षा दसवीं एवं बारहवीं की परीक्षा दिनांक के ही दिन स्थानीय परीक्षा होने के कारण उनको 12वीं की परीक्षा दिलाने हेतु परीक्षा लेखक अर्थात राइटर की समुचित रूप से व्यवस्था नहीं मिल पाएगी जिससे कि उनका आगामी भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। यह केवल उनके व्यक्तिगत कार्य विशेष के लिए नहीं है बल्कि छत्तीसगढ़ में पढ़ने वाले समस्त नेत्र दृष्टिबाधित दिव्यांग परीक्षार्थियों के भविष्य के ऊपर कुठाराघात होगा। जिला शिक्षा अधिकारी के उक्त आदेश से दृष्टिबाधित दिव्यांग विद्यार्थियों के भविष्य पर सवालिया प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है??
जिस तरह जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा बोर्ड परीक्षा की समाप्ति के पश्चात दोपहर 1:00 बजे से लेकर दोपहर 4:00 बजे तक स्थानीय नवमी एवं ग्यारहवीं की परीक्षा आयोजित किया जाना समझ से परे हैं। इस संबंध में उन्होंने अपना आवेदन पत्र जिला शिक्षा अधिकारी को प्रेषित किया था जिस पर उन्होंने कोई उचित व सकारात्मक जवाब ना देते हुए पिता-पुत्र के आवेदन पत्र को सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद पिता-पुत्र ने कलेक्टर महासमुंद से अपनी गुहार लगाई जिस पर उन्होंने उनको आश्वस्त करते हुए उचित मार्गदर्शन व कार्यवाही की बात कही लेकिन इस पर भी निराशा हाथ लगते ही उन्होंने पुनः विगत दिनांक 18 फरवरी 2025 को माननीय मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री छत्तीसगढ़ शासन को जिला कलेक्टर महासमुंद के माध्यम से अपनी व्यथा प्रकट करते हुए अपना आवेदन पत्र पुनः प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने प्रतिलिपि के रूप में सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर, संचालक संचानालय समाज कल्याण विभाग माना रायपुर एवं संभागीय संचालक शिक्षा संचानालय शिक्षा छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल परिसर रायपुर को अपनी व्यथा प्रकट करते हुए अवगत कराया लेकिन आज पर्यंत तक उनके इस संदर्भित आवेदन पत्र के ऊपर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई ना हीं उनको किसी भी उच्च अधिकारी के माध्यम से अब तक कोई आश्वासन नहीं मिला। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 253 के तहत बने दिव्यागजन अधिकार अधिनियम 2016 का अधिनियम संख्याक 49 के तहत दिव्यांग बच्चों को भी परीक्षा दिलाने का अधिकार है किंतु कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद के पत्र क्रमांक 560/वार्षिक परीक्षा/समय सारणी 2025 दिनांक 3 फरवरी 2025 स्थानीय परीक्षा कक्षा नवमी एवं ग्यारहवीं की परीक्षा के कारण उन्हें परीक्षा से वंचित होना पड़ेगा।पिता एवं पुत्र ने समस्त नेत्र दृष्टिबाधित दिव्यांग परीक्षार्थियों की ओर से मुख्यमंत्री तथा संबद्ध शिक्षा मंत्री छत्तीसगढ़ शासन एवं उच्च अधिकारियों से मांग करते हुए कहा कि उनके आवेदन पत्र पर पुनः विचार कर आगामी 10 वीं 12 वीं बोर्ड परीक्षा के साथ स्थानीय वार्षिक परीक्षा कक्षा नवमी एवं ग्यारहवीं की परीक्षा को साथ-साथ संचालित ना करते हुए उन्हें अलग से आयोजित किए जाने के मांग की है जिससे की समस्त नेत्र दृष्टिबाधित दिव्यांग परीक्षार्थियों को मुख्य परीक्षा से वंचित न होना पड़े तथा शिक्षा के प्रति उनके मनोबल व आत्मविश्वास को ठेस न पहुंचे। दिव्यांग पुत्र के पिता ने कहा कि सभी माता-पिता अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं इसलिए आज मैं भी अपने नेत्र से दिव्यांग पुत्र एवं उनके जैसे समस्त दृष्टिबाधित दिव्यांग बच्चों के सर्वहारा हित को ध्यान में रखते हुए मैंने यह कदम उठाया है। जिसे उच्च प्राथमिकता देते हुए विचार किया जाना चाहिए।
