छत्तीसगढ़

संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों एवं कर्तव्यों की दी गई जानकारी

संविधान के उद्देशिका का किया गया सामूहिक वाचन

संपादक कुंज कुमार रात्रे महासमुंद 11 जनवरी 2025/ भारत के संविधान पर अधारित आज स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय नयापारा महासमुंद में छात्र-छात्राओं के साथ व्याख्यान एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया गया। जिसमे मुख्य प्रवक्ता के रूप में उपस्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद के सचिव  दामोदर प्रसाद चन्द्रा द्वारा छात्र-छात्राओं को भारतीय संविधान तथा मानव अधिकार के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई इसके साथ ही सभी उपस्थित शिक्षकगणों एवं छा़त्र-छात्राओं द्वारा भारत के संविधान के उद्देशिका का सामुहिक रूप से वाचन किया गया कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद के सचिव श्री दामोदर प्रसाद चन्द्रा द्वारा भारत के संविधान तथा उनके महत्व और मानव अधिकारों के विषयों पर सामूहिक चर्चा करते हुए बताया कि भारतीय संविधान देश के मौलिक कानून के रूप में हमारे मूल्यों, सिद्वांतों और शासन के ढ़ाचे का प्रतीक है। यह भारम के सर्वोच्च विधि के रूप में भूमिका निभाता है तथा राज्यों के कामकाज का भी मार्गदर्शन करता है। संविधान विधि के शासन पर आधारित प्रशासन के लिए रूपरेखा स्थापित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति विधि से उपर नहीं है। संविधान मौलिक अधिकारों की गांरटी देता है जैसे वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता आदि की रक्षा करता है साथ ही इन अधिकारों के उल्लंघन होने पर कानूनी निवारण के लिए तंत्र प्रदान करता है। इसके अलावा सचिव  चन्द्रा द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 ए में सभी के लिए न्याय सुनिश्चित किया गया है और गरीबों तथा समाज के कमजोर वर्गो के लिए निःशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था की गई है। संविधान के अनुच्छेद 14 और 22 (1) के तहत राज्य का यह उत्तदायित्व है कि वह सबके लिए समान अवसर सुनिश्चित करे, समानता के आधार पर समाज के कमजोर वर्गो को सक्षम विधिक सेवाए प्रदान करने के लिए एक तंत्र की स्थापना करने के लिए वर्ष 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियत पास किया गया। इसी के तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) का गठन किया गया है, जो कानूनी सहायता कार्यक्रम लागू करने और उसका मूल्यांकन एवं उनके सतत निगरानी का कार्य कर लोगों को कानूनी सहायता एवं सलाह उपलब्ध कराती है। इसी प्रकार प्रत्येक राज्य में एक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जिसके अंतर्गत उस राज्य के पूरे सभी जिलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा तहसील क्षेत्रों में तालुका विधिक सेवा समिति का गठन किया गया है। इसका कार्य नालसा की नीतियों और निर्देशो को कार्य रूप देना और लोगो को निःशुल्क कानूनी सेवाए प्रदान कराना होता है। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य अमी रूफस, शिक्षकगण प्रमोद कुमार कन्नौजे, आकांशा भोई, जीआर टंडन सहित अधिकार मित्र हरिचंद साहू मोहित कुमार साहू उपस्थितथे।

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