संपादक कुंज कुमार रात्रे
महासमुन्द रायपुर दिनांक 17/07/2026 को नवा रायपुर सी बी डी रेल्वे स्टेशन प्रांगन मे छत्तीसगढ़ के अन्यत्र जिलों एवं तहसीलो से लगभग दस हजार कोटवारो ने अपनी उपस्थिति दर्ज किया, चुंकि विधानसभा सत्र के चलते धारा 144 होने के कारण बैठक दो किलोमीटर दूर सी बी डी रेल्वे स्टेशन नवा रायपुर मे श्री रुकेश कुमार नगारची कानूनी सलाहकार छत्तीसगढ़ कोटवार संघ के द्वारा सभा को सम्बोधित करते हुए आज दिनांक तक कोटवारो के हितो एवं रक्षा सुरक्षा व हक़ अधिकार के साथ प्रशासनिक और न्यायालायिन कार्यवाही जो फुटबाल खेल कि तरह खेलते हुए कभी राज्य शासन लात मारकर न्यायालय को देता है फिर न्यायलय लात मारकर प्रशासन की ओर फुटबाल (कोटवारो के हितो पर प्रतिघात करता है ) देता है
श्री रुकेश कुमार नगारची ने अपने सम्बोधन मे विस्तृत रूप से अवगत करवाया कि मालगुजारों के द्वारा दी गई भूमि मध्य भारत,,(प्रांत ) में सम्मिलित नहीं है एवं सभी राज्य में मालगुजारी भूमि का भूमि स्वामी अधिकार राउत नाई धोबी मेहर लोहार झाखर, इत्यादि को प्राप्त हो चुका है
यह भूमि रैयती है एवं खिदमती से प्राप्त है संविधान के पूर्व का है 1914-15 एवं 1927 -28 का मिशल बंदोबस्त से मालिक मकबूजा का नाम है सभी सेवादारों को प्राप्त है जैसे रावत नाई धोबी लोहार मेहर झाकर कोटवार इत्यादि सभी का मालगुजारी भूमि समाप्ति अधिनियम 1950 की धारा 45 ,(3 )के तहत भूमि का भूमि स्वामी हो चुका है
गांव का मालगुजार द्वारा प्रदत्त एक ही समय में नाई धोबी लोहार ग्राम नौकर (वर्तमान कोटवार ) सबको भूमि दिया गया है, इसमें रावत नाई धोबी लोहार मेहर झाखर कोटवार इत्यादि, में से कोटवारों को छोड़ दिया गया ,बाकी सब स्वमेव भू स्वामित्व अधिकार मे धीरे धीरे आ गए!
कोटवार ब्रिटिश शासन काल से ग्राम नौकर /चौकीदार के रूप मे निरंतर 175 वर्षों से लगभग आज पर्यन्तक कार्य निरंतर निर्बाध पीढ़ी दर पीढ़ी से काम करते आ रहे है । जहां सिर्फ कोटवारों को वंचित किया गया है,जिसका प्रमुख कारण राजनैतिक रोटियां सेंकना नाम मात्र है कोटवारो कि मालगुज़ारी भूमि पर ज्यादातर राजनेताओ निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का कब्जा है जो साम दाम दंड भेद कि रीति नीति अपना कर क्रय कर भू स्वामी बन स्कुल कॉलेज उद्योग खोल कर संचालित है इस पर आज दिनांक तक कोई प्रशासनिक बुलडोजर नहीं चला और ना ही कोई सिविल वाद दायर हुआ!
शासन प्रशासन का 1950 के पूर्व मालगुजारों द्वारा सेवा के बदले प्रदत्त भूमियो पर कोई कानूनी प्राधिकार नहीं है, कानून सबके लिए समान अधिकार बराबर है, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, और मानव अधिकार का हनन होते हुए राजस्व विभाग का विषय बताएं है, जो बहुत दुख की बात है। माननीय न्यायालय हाईकोर्ट डीबी बेंच ने फैसला 10/08/2018 को दिया है वह भी फैसला अनुचित एवं गलत है।इस प्रकार की फैसले से पूरे मालगुजार द्वारा दी गई भूमि रावत नाई धोबी लोहार मेहर झाखर इत्यादि सभी का भूमि स्वामी सेवा भूमि अहस्तांतरणीय के लिए फैसला होना चाहिए था सिर्फ कोटवारों को प्रभावित किया गया कोटवार थर्ड पार्टी है दोषी नही है याचिकाकर्ता आवेदक और अनावेदक की बातों पर फैसले होना चाहिए था जो कोटवार संघ को सिर्फ प्रभावित किया गया,इस प्रकार की भूमि अन्य सेवादारों की भूमि को भी फैसले से प्रभावी आदेश दिया गया होता तो न्याय मानते या होता राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग मंत्रालय रायपुर छत्तीसगढ़ व आयुक्त भू अभिलेख शाखा दोषी हैं जो जानते हुए कि नियम और अधिनियम क्या है,,2011,एवं 2014 पार्ट -2 का आदेश बिना कानून प्राधिकार के निकाला गया आदेश जबरदस्ती थोपा गया है
वर्ष 2014 मे महाधिवक्ता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जो सुझाव राज्य शासन को दिया उसके विपरीत राज्य शासन के मातहत अधिकारियों कर्मचारियों (पटवारियो ने )ने कार्य किया और जो कार्य करना चाहिए था वो आज दिनांक तक कंही नहीं हुआ जैसे बिना अनुमति प्राप्त किये गए बिक्री भूमि के विरुद्ध सिविल वाद दायर करते हुए सेवा भूमि दर्ज करना
ये किसी अधिकारी ने नहीं किया और ना ही कोई पटवारी इस पर प्रतिवेदन तहसीलदार को प्रस्तुत किया,जो कोटवारों को बंधुवा मजदूरों की भांति नाच नचाते आज दिनांक तक आ रहे है!
आज तहसीलदार और पटवारी सिर्फ गांधी कि भाषा आसानी से समझने लगे है तभी तो सारे संवैधानिक नियमों को ताक पर रखकर गैर वंशज की कोटवारी पद पर नियुक्ति लाखों रूपये मिलने प्राप्त होने पर कर रहे है और पीड़ित प्रभावित परिवार कोर्ट कचहरी का चक्कर काटते काटते आत्महत्या करने मजबूर हो रहे है हम जानते हैं माननीय न्यायालय हाईकोर्ट बिलासपुर का फैसला गलत एवं अनुचित हैं,,आज पर्यन्तक हमारे पद के संबंध में किसी प्रकार की शुद्धता नहीं किया गया ना ही किसी प्रकार की शासकीय सुविधाएं मुहैया कराने की मुड में है ।
ऐसी रीति नीति शासन प्रशासन की रवैऐ से कोटवार संघ पीड़ित हैं मानवाधिकार का हनन है,, विसंगति में बांट कर रखा गया है, कोटवार को 10 एकड़ भूमि देने का प्रावधान था जिसमे जिसको जितनी मालगुज़ारी हक मे भूमि वर्ष 1950 के पूर्व प्राप्त थी उतना कम करके कुल दस एकड़ प्रदाय करना था जिसमे मालगुज़ारी उन्मूलन अधिनियम 1950 के अंतर्गत नाई धोबी लोहार ग्राम नौकर को भू स्वामित्व अधिकार स्वमेव प्राप्त है किन्तु कोटवारो को छोड़ शेष सभी आज दिनांक तक मालिकाना हक़ मे है दूसरी बात सर्वाराकार भूमि जो मंदिर के उद्धर विकास के लिए दान किया गया था जिसकी बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित है वो भूमि पूजारियों द्वारा बिक्री किया जा रहा है जिसमे शासन प्रशासन चुप्पी साधे मौन है
मेरे सम्मानित साथियों इस बात के लिए आप लोग समझे आगे आए अपने हक़ अधिकार को समझे और प्राप्त करें हासिल करें इन्ही जिम्मेदारी और दायित्व के साथ हम सब को अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए अपने हक़ अधिकार के लिये संघर्ष करना होगा
उक्त उदबोधन से पुरे छत्तीसगढ़ के कोटवारो को उनके हक़ अधिकार की विस्तृत व्याख्या करके श्री रुकेश कुमार नगारची ने सम्बोधित किया जहां बलौदा बाजार लवन बेमेतरा कवर्धा मुंगेली जांजगीर रायगढ़ धमतरी कांकेर दुर्ग बालोद राजनांदगाँव व अन्य तहसीलो से भारी मात्रा मे कोटवार उपस्थित रहे!।