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क्रूड सस्ता होने के बाद भी पेट्रोल डीजल सस्ता नहीं :-आलोक चंद्राकर 

जनता महंगाई से त्रस्त,भाजपा सरकार ठगने में मस्त

संपादक कुंज कुमार रात्रे महासमुंद :- राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड छग के उपाध्यक्ष,प्रदेश कांग्रेस के सयुंक्त महामंत्री ने कहा की केंद्र की भाजपा सरकार की कथनी और करनी का अंतर एक बार फिर देश की जनता के सामने आ गया है। अमरीका-ईरान के बीच शांति समझौता होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल युद्ध से पहले के स्तर 74.64 डॉलर पर लौट आया है। तेल कंपनियों का मार्जिन एशिया संकट से पहले वाले स्तर से भी ऊपर पहुंच गया है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक पेट्रोल पंपों पर एक रुपए की भी राहत जनता को नहीं मिली है। यह सीधे-सीधे जनता की जेब पर डाका है।

श्री चन्द्राकर ने कहा कि भाजपा सरकार तर्क दे रही है कि युद्ध के दौरान तेल कंपनियों को प्रतिमाह 30,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। अब कंपनियां पहले उस घाटे की भरपाई करेंगी, तब जाकर जनता को सस्ता पेट्रोल-डीजल मिलेगा। यदि ऐसा है तो केंद्र सरकार बताए कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के दाम बढ़ते हैं तो तेल कंपनियां आधी रात को रेट बढ़ा देती हैं। उस समय जनता के नुकसान की भरपाई कौन करता है। तब तो सरकार कहती है कि दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय होते हैं। आज जब क्रूड 45 डॉलर सस्ता हो गया तो वही फॉर्मूला कहां चला गया। सच्चाई यह है कि भाजपा सरकार तेल कंपनियों के मुनाफे की चौकीदारी कर रही है और जनता को महंगाई की आग में झोंक दिया गया है। सरकार जहाज के किराए का बहाना भी बना रही है। बताया जा रहा है कि होर्मुज चार महीने बंद रहने से टैंकरों ने लंबे रास्ते लिए और अब किराया 9 गुना तक बढ़ गया है। यह तर्क भी खोखला है। होर्मुज अब खुल चुका है। शिपिंग कॉस्ट धीरे-धीरे सामान्य होगी, सरकार को जनता को तुरंत राहत देनी चाहिए।

आलोक ने कहा कि क्रूड सस्ता होने का फायदा पहले जनता को मिलना चाहिए, बाद में कंपनियों के बैलेंस शीट सुधरें। भाजपा ने आपदा को हमेशा अवसर में बदला है। कोरोना में दवाइयों की कालाबाजारी हुई, युद्ध के नाम पर जनता से पेट्रोल-डीजल पर मनमाना टैक्स वसूला गया। आज जब दुनिया भर में कच्चा तेल सस्ता हो रहा है, तब भी भारत में दाम कम नहीं हो रहे। इसका एक ही मतलब है कि सरकार की नीयत साफ नहीं है।

श्री चंद्राकर ने कहा कि 10 रुपए उत्पाद शुल्क घटाने का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार बताए कि उस कटौती का एक रुपया भी जनता की जेब में क्यों नहीं पहुंचा। सारा फायदा तेल कंपनियों की तिजोरी में चला गया। यह कौन सा अर्थशास्त्र है जहां सरकार टैक्स घटाए और दाम जस के तस रहें। छत्तीसगढ़ का किसान, मजदूर, छोटा व्यापारी सब महंगे डीजल से परेशान हैं। खेती की लागत बढ़ गई है। माल भाड़ा बढ़ने से सब्जी से लेकर हर सामान महंगा हो गया है। लेकिन दिल्ली में बैठी सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत 15 रुपए प्रति लीटर कम किए जाएं। क्रूड में 45 डॉलर की गिरावट के बाद यह राहत बहुत छोटी है। सरकार यदि जनता का हित चाहती है तो बिना देरी के दाम घटाए। युद्ध और घाटे का बहाना अब नहीं चलेगा। तेल कंपनियों ने जनता से वसूली करके अपना घाटा पहले ही बहुत हद तक पाट लिया है। अब मुनाफाखोरी बंद होनी चाहिए। भाजपा सरकार याद रखे कि जनता सब देख रही है। महंगाई, बेरोजगारी और झूठे वादों से त्रस्त जनता अब हिसाब मांगेगी। क्रूड सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल महंगा रखना आर्थिक अपराध है जिसे जनता कभी माफ नहीं करेगी !!

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