संपादक कुंज कुमार रात्रे
महासमुंद। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री अमित साहू एवं भाजपा जिला अध्यक्ष येतराम साहू ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि यह केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं पर सुनियोजित हमला था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग कर देश पर आपातकाल थोप दिया, जबकि उस समय देश में न तो युद्ध की स्थिति थी, न कोई सशस्त्र विद्रोह और न ही किसी प्रकार का बाहरी आक्रमण हुआ था।
भाजपा नेताओं ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त किए जाने और उनकी लोकसभा सदस्यता पर प्रश्नचिह्न लगने के बाद अपनी सत्ता और कुर्सी बचाने की मंशा से यह कदम उठाया गया। न्यायपालिका से मिली चुनौती के बाद लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने के बजाय सत्ता के संरक्षण के लिए पूरे देश को आपातकाल की बेड़ियों में जकड़ दिया गया। यह एक डरी हुई सरकार और भयभीत प्रधानमंत्री की सत्ता बचाने की रणनीति थी, जिसे लोकतंत्र और संविधान की कीमत पर लागू किया गया।अमित साहू ने कहा कि जिस संविधान की शपथ लेकर इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री पद ग्रहण किया था, उसी संविधान की आत्मा को कुचलते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था को एक झटके में तानाशाही की ओर धकेल दिया गया। शासन-प्रशासन की पूरी व्यवस्था को सत्ता के इशारों पर चलने वाली कठपुतली बनाने का प्रयास किया गया तथा असहमति की हर आवाज को दबाने का षड्यंत्र रचा गया। आपातकाल के दौरान कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका जैसे लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को सत्ता के दबाव में लाकर उनकी स्वतंत्रता को प्रभावित किया गया। नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए और लाखों लोगों को बिना किसी अपराध के जेलों में डाल दिया गया। विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र नेताओं और लोकतंत्र समर्थकों को केवल इसलिए प्रताड़ित किया गया क्योंकि उन्होंने सत्ता के खिलाफ आवाज उठाई थी।
उन्होंने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता पर भी अभूतपूर्व हमला किया गया। समाचार पत्रों पर कठोर सेंसरशिप लागू की गई, कई बड़े अखबारों की बिजली तक काट दी गई ताकि वे सरकार के विरुद्ध कोई समाचार प्रकाशित न कर सकें। पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंट दिया गया। पूरे देश में भय, दमन और असहिष्णुता का वातावरण निर्मित कर लोकतंत्र को बंधक बना लिया गया था।
भाजपा नेताओं ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, नानाजी देशमुख सहित हजारों लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान के कारण देश में पुनः लोकतंत्र की स्थापना संभव हो सकी। उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए लोकतंत्र की रक्षा का प्रेरणास्रोत है।
आपातकाल केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव जागरूक और सजग रहने की चेतावनी है। भारतीय जनता पार्टी संविधान, लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध है तथा आपातकाल की 51वीं बरसी पर सभी लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन करती है।