रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे 
महासमुंद, 30 अप्रैल 2026।वार्ड क्रमांक 23 पंजाबी पारा स्थित निज निवास में 21 अप्रैल से प्रारंभ श्रीमद् भागवत कथा महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह का 28 अप्रैल मंगलवार को अत्यंत भक्तिमय वातावरण में भव्य समापन हुआ। अंतिम दिवसों में कथा स्थल भक्ति, भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा के अनुपम संगम का साक्षी बना।
बैसाख शुक्ल दशमी के पावन अवसर पर स्थानीय श्री राम जानकी धाम से पधारे कथा व्यास आचार्य श्री नारायण दास वैष्णव जी ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का मधुर एवं अलौकिक प्रसंग सुनाया। विवाहोत्सव की भांति सजे पंडाल में श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भगवान के दिव्य मिलन का स्वागत किया। रुक्मिणी हरण से लेकर द्वारका में संपन्न विवाह की कथा ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। आचार्य नारायण दास जी ने इस प्रसंग का आध्यात्मिक अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि यह जीवात्मा और परमात्मा के पावन मिलन का प्रतीक है।
एकादशी तिथि पर सुदामा चरित्र का हृदयस्पर्शी वर्णन हुआ। सुदामा और श्रीकृष्ण की निष्कलुष मित्रता, तंदुल की तीन मुट्ठी भेंट और भगवान की कृपा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं। कथा के माध्यम से आचार्य जी ने बताया कि सच्चा प्रेम और समर्पण ही ईश्वर को प्राप्त करने का सरल मार्ग है।
द्वादशी तिथि पर वैदिक विधि-विधान के साथ हवन-पूर्णाहुति संपन्न हुई। यजमान दंपतियों ने मंत्रोच्चार के बीच हवन कुंड में आहुतियां अर्पित कर सुख-शांति, समृद्धि एवं विश्व कल्याण की मंगलकामना की। इसके उपरांत श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेश, तुलसी वर्षा, कपिला तर्पण एवं महाप्रसादी वितरण के साथ कार्यक्रम पूर्ण हुआ।
समापन अवसर पर निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच श्रद्धालु झूमते-गाते नजर आए। विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
विगत 21 अप्रैल को रामेश्वरी मंदिर से निकली भव्य कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुए इस यज्ञ में प्रतिदिन कथा, पूजन एवं अनुष्ठान संपन्न होते रहे। पुरोहित पंडित हेमन्त दास वैष्णव (महासमुंद) एवं पंडित सूरज दास वैष्णव (चिंगरौद) ने पूरे आयोजन को विधि-विधान से सम्पन्न कराया।
आयोजनकर्ता श्रीमती प्रेमशीला पोषण साहू एवं परिवार ने समस्त श्रद्धालुओं, सहयोगियों एवं क्षेत्रवासियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन सभी की आस्था, सहयोग और समर्पण का ही फल है।
आचार्य नारायण दास वैष्णव जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का यह दिव्य अनुष्ठान आत्मिक शुद्धि, भक्ति जागरण और मानव जीवन के परम उद्देश्य की ओर अग्रसर करने वाली पावन साधना है। जिसने भी इस अमृतमयी कथा का श्रवण किया, उसके जीवन में श्रद्धा, शांति और परम आनंद का संचार अवश्य होगा।
