रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे
महासमुन्द रायपुर। सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों में वेतन विसंगतियों को लेकर गहरा असंतोष व्याप्त है। हाल ही में लागू किए गए पुनरीक्षित वेतनमान में इन कर्मचारियों के वेतनमान में वृद्धि का लाभ नहीं दिए जाने से कर्मचारियों में निराशा है। इस पर छत्तीसगढ़ राज्य दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी संघ का कहना है कि वर्षों से समान कार्य करने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में न केवल कम वेतन मिलता है, बल्कि महँगाई भत्ते, चिकित्सा सुविधा, प्रोविडेंट फंड, और अन्य लाभों से भी वंचित रखा जा रहा है। हम दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन जब वेतन की बात आती है तो हमारे साथ भेदभाव होता है। यह हमारे साथ अन्याय है। कर्मचारी संघ ने इस मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाने की बात कही है। उन्होंने मांग की है कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी पुनरीक्षित वेतनमान के अनुसार समुचित वेतन वृद्धि और लाभ दिए जाएं। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी वर्तमान पुनरीक्षित वेतनमान में वृद्धि न होने के कारण अत्यंत असंतुष्ट हैं। उनका मानना है कि वेतनमान में किसी प्रकार की वृद्धि का लाभ केवल स्थायी कर्मचारियों को ही मिलता है, जबकि वे निरंतर कार्य करने के बावजूद वित्तीय अस्थिरता और न्यूनतम आय जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। अल्पवेतन से इन कर्मचारियों का जीवनयापन और परिवारिक दायित्वों को निभाना अत्यंत कठिन हो जाता है। इसके अलावा, उन्हें सामाजिक सुरक्षा, बीमा, अवकाश, चिकित्सा सुविधा जैसी अनेक आवश्यक सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होतीं, जो स्थायी कर्मचारियों को प्राप्त होती हैं। यह बात छत्तीसगढ़ राज्य दैनिक वेतनभोगी संघ के प्रदेशाध्यक्ष मिलाप यादव , महामंत्री निशांत राज दुबे , कोषाध्यक्ष दीपक दशमेर ने संयुक्त रूप से कही है ।