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शिक्षा विभाग में युक्तिकरण बना शिक्षकों की पीड़ा का कारण

सीनियर-जूनियर का ध्यान नहीं, काउंसलिंग के समय दावा आपत्ती पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया।

रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे शंमहासमुंद में राज्य के शिक्षा विभाग में चल रही युक्तिकरण प्रक्रिया अब शिक्षकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। विभाग द्वारा जारी इस प्रक्रिया में वरिष्ठता, विषय विशेषज्ञता जैसी महत्वपूर्ण बातों को दरकिनार कर केवल पद संख्या के आधार पर स्थानांतरण किए जा रहे हैं। इससे न केवल सीनियर और जूनियर शिक्षकों में असंतोष पैदा हुआ है, बल्कि शिक्षकों का मनोबल भी गिर रहा है।

आश्चर्य की बात यह है कि इस युक्तिकरण में शिक्षकों को काउंसलिंग के समय दावा आपत्ति का पर्याप्त समय नहीं दिया गया । कई शिक्षक वर्षों से एक ही विद्यालय में अपनी सेवा दे रहे थे, लेकिन उन्हें अचानक बिना किसी संवाद या सहमति के दूसरी जगह भेज दिया गया। इससे शिक्षकों के पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।

शिक्षकों का कहना है कि यदि युक्तिकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता होती, सीनियर-जूनियर का ध्यान रखा जाता और काउंसलिंग के माध्यम से विकल्प दिया जाता, तो इसे वे सहर्ष स्वीकार करते। परंतु, वर्तमान प्रणाली ने उन्हें केवल “स्थान पूर्ति” का माध्यम बना दिया है।

विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि छात्रों की संख्या और आवश्यकताओं के आधार पर यह कदम उठाया गया है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि इस प्रक्रिया में मानवीय पहलुओं की पूरी तरह से अनदेखी की गई है।

शिक्षकों ने मांग की है कि युक्तिकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए, वरिष्ठता और अनुभव का सम्मान किया जाए, तथा सभी को काउंसलिंग के माध्यम से स्थान चयन का अवसर दिया जाए। अन्यथा यह व्यवस्था शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षक-छात्र संबंधों को प्रभावित कर सकती है।

 

 

 

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