संपादक कुंज कुमार रात्रे
महासमुंद/छत्तीसगढ़ तकनीकी सहायक कर्मचारी संघ (VB G RAM G) के आह्वान पर आज यानी 13 अक्टूबर 2026 से प्रदेशव्यापी 3 दिवसीय सांकेतिक हड़ताल व उग्र धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों के राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्यरत तकनीकी सहायकों ने एक साथ सामूहिक अवकाश लेकर मोर्चा खोल दिया है, जिससे ग्रामीण विकास और निर्माण से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं के पहिए पूरी तरह थम गए हैं। संघ ने स्थानीय प्रशासन से लेकर पुलिस प्रशासन और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद पंचायत) तक को अपनी मांगों का आधिकारिक ज्ञापन सौंप दिया है।
क्या हैं आंदोलनकारियों की 03 प्रमुख मांगें?
तकनीकी सहायकों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी निम्नलिखित मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया जाता, उनका आक्रोश शांत नहीं होगा:
विभाग में समायोजन: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत समस्त तकनीकी सहायकों के पदों को नियमित करते हुए तत्काल विभाग में समायोजित किया जाए।
स्थायी सेवा नियम: नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक पंचायत सचिवों की तर्ज पर इनके लिए भी ‘स्थायीकरण नियमावली’ तत्काल प्रभाव से लागू की जाए।
सम्माजनक पदनाम: ‘तकनीकी सहायक’ का पदनाम बदलकर सम्मानजनक रूप से कनिष्ठ अभियंता (VB G RAM G) किया जाए।
“न बीमा है न पेंशन है, दुनिया भर का टेंशन है” – नारों से गूंजा धरना स्थल
धरना स्थल से आ रही तस्वीरें कर्मचारियों की बदहाली और भारी आक्रोश को बयां कर रही हैं। पंडाल में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष कर्मचारी हाथों में तख्तियां लेकर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों के नारों में व्यवस्था के खिलाफ तीखा गुस्सा साफ देखा जा सकता है:
“संविदा प्रथा बंद करो, नियमितीकरण करो!”
“हर माह समय पर वेतन दो, यात्रा भत्ता देना होगा!”
“मानसिक उत्पीड़न बंद करो, एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई नामंजूर!”
मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक तंगी का गंभीर आरोप
कर्मचारियों का आरोप है कि ‘विकसित भारत जी राम जी’ योजना के नाम पर उनका मानसिक और शारीरिक शोषण किया जा रहा है। मूल काम के अलावा उन पर प्रधानमंत्री आवास निर्माण की संपूर्ण जिम्मेदारी जबरन थोप दी गई है, जो कि उनके सेवा नियमों के दायरे में नहीं आता। इसके बावजूद, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और बैठकों के माध्यम से साप्ताहिक लक्ष्य पूरा करने का भारी दबाव बनाया जाता है और काम न होने पर वेतन रोकने, सीआर खराब करने व सेवा से बर्खास्त करने की धमकियां दी जाती हैं।
आर्थिक मोर्चे पर भी कर्मचारियों की स्थिति बदतर है। इस बेतहाशा महंगाई के दौर में भी उन्हें बेहद कम वेतन मिल रहा है। विडंबना यह है कि वह अल्प वेतन भी हर 2 से 4 महीने तक अटका रहता है, जिससे परिवारों के सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया है। कई जिलों में तो नियमानुसार मिलने वाली वार्षिक वेतन वृद्धि और यात्रा भत्ता भी सालों से नहीं दिया गया है।
आगे क्या?
कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यह 15 अक्टूबर 2026 तक चलने वाली महज एक सांकेतिक चेतावनी है। यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी 03 सूत्रीय मांगों और 04 सूत्रीय समस्याओं का तत्काल निराकरण नहीं किया, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन और उग्र रूप अख्तियार कर लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।