रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे
महासमुन्द विधानसभा में कांग्रेस किस तरह कार्यकताओं के अभाव का दंश झेल रही है इन बातो को उस समय नजर आई जब ब्लाक कांग्रेस कमेटी ग्रामीण कार्यकारिणी में एक मृत पूर्व जनप्रतिनिधि का मनोयन किया गया l
पूर्व के अविभाजित मध्यप्रदेश में महासमुन्द विधानसभा कांग्रेस का अभेद गढ़ के रूप में जाना जाता था lदेश की राजधानी दिल्ली के राजनैतिक गलियारों में भी महासमुंद की चर्चा उपरोक्त कारणों से की जाती थी l लंबे समय इस कांग्रेस के अभेद गढ़ को अनेक राजनैतिक समीकरणों ने दीमक की तरह खोखला किया व आज इस किले को कांग्रेस की विपक्ष के दल दो बार भेद कर फतह कर चुके है l
ब्लाक काँग्रेस कमेटी के कार्यकारिणी में समीपस्थ ग्राम से मृतक ओंकार चंद्राकर का सूची में स्थान …अल्पसंख्यक वर्ग को पूरी तरह दरकिनार करना..क्षेत्र बाहुल्य आदिवासी समाज व अनु जाति समाज को कार्यकारिणी में सीमित. स्थान देना .आदि ऐसे अनेको कारण से.. बाज़ार में चर्चा का दौर चल पड़ा कि….कांग्रेस की अब संख्या बल महासमुंद में एक क्षेत्रिय. दल की भांति हो चली है l
राजनैतिक मामलों के सूत्र बताते है कि …सन 80 के दशक के बाद एक समाज का दबदबा….कांग्रेस हाईकमान का पिछड़ा वर्ग समाज से ताल्लुक केवल दो समाजो को ही सत्ता व संगठन में प्रमुख स्थान देने की रणनीति….आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक तक ही सीमित रखने के चलते व साथ ही अनु जाति से सबंध रखने वाले नेताओं के हितों के साथ कुठाराघात आदि ऐसे अनेक कारणों ने कांग्रेस को सीमित कर दिया है l
पूर्व में कभी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की गणना सैकड़ों से प्रारंभ होती रही व आज दहाई की संख्या में सिमट गया व विपक्ष भाजपा इकाई की संख्या से प्रारंभ होकर…कांग्रेस से बहुत आगे हो गई जो विचारणीय तथ्य है l नगर के मुख्य चौक स्थित कांग्रेस भवन में नियमित बैठने वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं की संख्या से इस बात की तस्दीक की जा सकती है कि …अब कांग्रेस का क्षेत्र में सूर्य शैन:शैंन:अस्त की ओर तेज गति से गतिमान है l