रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे महासमुंद। पूर्व पार्षद व समाज सेवी पंकज साहू ने जिला अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज में व्याप्त समस्याओं पर कहा कि भाजपा राज में स्वास्थ्य व्यवस्था स्ट्रेचर पर पहुंच गई है। जिस तरह से मरीजों को जिले के सबसे बड़े अस्पताल में परेशानी आज के स्थिति में हो रही है, वह शायद कभी नहीं हुई होगी। जांच उपकरणों की कमी तथा दवाओं की कमी से पहले ही जूझ रहे जिला अस्पताल अब गर्भवती माताओं को भी सुविधा प्रदान नहीं कर पा रही है। सैकड़ों मरीजों सहित गर्भवती महिलाओं का यहां सोनोग्राफी नहीं हो पाने से उन्हें भटकना पड़ रहा है। 15 दिन में हो लगभग 1 हजार मरीज सोनोग्राफी नहीं होने के कारण वापस लौटे हैं। रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं करने के कारण यह स्थिति सामने आई है। गरीब वर्ग के मरीज निःशुल्क व सस्ता उपचार के आस में जिला अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन, यहां की बदहाली देख सरकार व सत्ता पक्ष के जनप्रतिधियों को कोसते हुए निजी अस्पतालों में उपचार कराने विवश हो रहे हैं। जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली यहां के जनप्रतिनिधियों को नहीं दिख रहा। इसलिए अब तक न ही स्थानीय सांसद, विधायक और न ही सत्ता पक्ष के जन प्रतिनिधियों ने अब तक किसी प्रकार का पत्राचार शासन को नहीं किया। स्थानीय विधायक की निष्क्रियता तो जग जाहिर है, उन्हें केवल जमीन के कारोबार में ही व्यस्त देखा जा सकता है। जनता की परेशानियों से विधायक को कोई सरोकार नहीं है। सांसद तो केवल डमी सांसद बन कर रह गई है। जिले के चारों विधानसभा सहित 8 विधान सभा क्षेत्र की जनता ने उन्हें चुनकर केंद्र भेजा है। लेकिन, संसद में इन गंभीर समस्याओं पर वे कभी बात रखते नजर नहीं आती। यही हाल प्रशासनिक अफसरों का है। प्रशासन शासन के योजनाओं को धरातल पर उतारने वाला प्रमुख माध्यम है। लेकिन, प्रशासनिक अधिकारी व्यवस्था में सुधार करने के बजाए शासन के नाकामियों पर पर्दा डालने का काम कर रहा है। शासन के कमियां बताने पर प्रशासन की ओर से तत्काल विज्ञप्ति जारी कर प्रतिक्रिया दी जाती है, कि फलां योजना से अमुख व्यक्ति के जीवन में बदलाव आया। प्रशासन यह क्यों नहीं बताता कि शासन प्रशासन की उदासीनता के चलते हजारों लोग किस तरह परेशान हो रहे हैं। साहू ने कहा कि पूर्व में भी उन्होंने जिला अस्पताल में डाक्टरों, स्टाफ नर्स सहित अन्य कर्मचारियों की कमी को तत्काल दूर कर कर्मचारियों की भर्ती की मांग की थी। आवश्यक उपकरणों की कमियों को दूर कर मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया था। लेकिन, इस दिशा में शासन प्रशासन की खामोशी यह साफ संकेत दे रहा है कि गरीब मरीजों, आम जनता की परेशानी से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। शासन प्रशासन को केवल कमीशन मिलना चाहिए। चाहे इसके लिए उन्हें कालातीत दवाई खरीदी करना पड़े या जंग लगे सिजेरियन ब्लेड।
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