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बच्चों में परीक्षा को लेकर श्याम बालाजी कालेज में मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता कार्यक्र

बच्चों को बताएं कि परीक्षा महज एक व्यवस्था है, जो जिंदगी को बेहतर बनाने मात्र के लिए है-एकता लंगेह  

रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे महासमुन्द ,15महासमुंद। कल शनिवार को दोपहर महासमुंद स्थित श्याम बालाजी कालेज में स्वास्थ्य शिविर व बच्चों में परीक्षा को लेकर कालेज व आस्था वेलफेयर एवं एजुकेशन सोसायटी के तत्वावधान में मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. एकता लंगेह थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगरपालिका महासमुंद अध्यक्ष निखिलकांत साहू थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में तारा चंद्राकर, सोसायटी अध्यक्ष मधु शर्मा, निरंजना चंद्राकर उपस्थित थे। प्रथम सत्र में स्वास्थ्य शिविर के तहत डा. विकास, डा. सुजता, मनोरोग विभाग से डा. टिकेश्वरी साहू ने उपस्थित जन समूह का स्वास्थ्य परीक्षण किया।

तदुपरांत सभा को संबोङ्क्षंधत करते हुए मुख्य अतिथि डा. एकता लंगेह ने कहा कि परीक्षा नजदीक आते ही बच्चों में मानसिक अस्थिरता स्वाभाविक है। वे इस वक्त स्वभाव से चिड़चिड़े हो जाते हैं। माता-पिता और गुरुजनों से बात बात पर नाराजगी जाहिर करते हैं और पढ़ाई से जी चुराते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन बच्चों को डिप्रेशन में जाने से पहले ऐसे बच्चों की स्थिति जानकर उन्हें समय देने की आवश्यकता है। बच्चों की भावनाओं को समझने की जरूरत है। शिक्षक और पालक मिलकर बच्चों को इस स्थिति से बाहर निकाल सकते हैं। पालक और शिक्षक अच्छी तरह जानते हैं कि बच्चा मानसिक रूप से किस हद तक गुजर रहा है। बच्चों को बताएं कि परीक्षा महज एक व्यवस्था है, जो जिंदगी को बेहतर बनाने मात्र के लिए है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निखिलकांत साहू ने कहा कि बच्चों के मानसिक हालत को संभालने के लिए पालक और शिक्षक मिलकर बेहतर तरीके से योजना बना सकते हैं। बच्चों का परीक्षा से डरना स्वाभाविक है लेकिन इस इस स्थिति से उन्हें बाहर निकालने का काम भी उनसे अच्छा कोई नहीं कर सकता। हर बच्चे में रोजाना एक घंटे पढऩे की आदत डालें। इसके बाद परीक्षा से उन्हें बिल्कुल डर नहीं लगेगा। बच्चा साल भर पढ़ाई करके परीक्षा को मजे से गुजार सकेगा।

मनोराग विभाग से उपस्थित डा. टिकेश्वरी साहू ने बच्चों को परीक्षा पूर्व मानसिक रूप से तैयार करने होने के टिप्स दिए। कहा कि सुबह सोकर जल्दी उठें और हर रोज पौष्टिक आहार लें। मोबइल का उपोग कम से कम करें या जरूरत के हिसाब से ही करें। दोस्तों के साथ खेलें लेकिन पढ़ाई के लिए समय ज्यादा निकालें। हर रोज नींद पूरी लें। एकाग्र होकर पढ़ाई करें। मन को शांत रखें और परीक्षा से डरें नहीं बल्कि एक अच्छा अवसर मानकर खुशी मिजाज से परीक्षा दें। इससे तैयारी के हिसाब से अच्छे अंक आने की संभावना होती है।

निरंजना चंद्राकर ने कहा कि बच्चे मन के बहुत सच्चे होते हैं। उनके दिमाग में यदि परीक्षा का डर है तो इसे निकालना जरूरी है। हर बच्चे के अंदर योग्यता होती है, उसे पहचानना जरूरी है। माता पिता को चाहिए कि परीøा के समय बच्चे के खानपान और सेहत पर ध्यान रखें। दिनचर्या में ज्यादासे ज्यादा समय बच्चों को दें। उनकी तैयारी में साथ निभाएं। बच्चे को डिप्रेशन से नहीं पाने की स्थिति में वही डिप्रेशन बच्चों को निगल जाता है।

मधु शर्मा ने उपस्थित सभी जनों को स्वास्थ्य जागरुकता की शपथ दिलाई। तारिणी चंद्राकर ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस दौरान शबनम धनवानी,भारती भान साहू,तुषार चंद्राकर समेत आस्था वेलफेर सोस्याटी के समस्त सदस्य व श्याम बालाजी कालेज के विद्यार्थी व स्टाफ उपथत थे। आभार तारा चंंद्राकर ने किया।

 

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