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निर्वाचन प्रपत्र 7 का दुरुपयोग व फर्जीवाड़ा पर लगाए रोक 

रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे महासमुन्द छ ग प्रदेश कांग्रेस कमेटी के स.महामंत्री अधिवक्ता आलोक चंद्राकर ने एसआईआर प्रक्रिया की मंशा पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा कि है गणना पत्रक में 2003 के मतदाता सूची सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद पुनः उन्हें नोटिस जारी कर लाइन में लगवाया गया और अब दावा आपत्ति में जिस प्रकार से प्रपत्र 7 का दुरुपयोग कर व्यक्ति विशेष के नामों को चिन्हांकित कर उन्हें स्थानांतरित बताकर उनके नाम को कटवाने की साजिश किया जा रहा है जो मतदाता के संवैधानिक अधिकार को समाप्त करने का कार्य है पकड़े जाने के बाद प्रपत्र 7 नहीं भरने की बातें कर रहा है ऐसी स्थिति में पूरी प्रशासनिक तंत्र एवं बीएलओ की कार्यवाही शंकास्पद है जो मतदाता एक माह पूर्व गणना पत्र भरे उसके नाम पर आपत्ति अन्य स्थान का व्यक्ति करे और उस प्रपत्र 7 में ना आपत्ति का विकल्प है को न मोबाइल नंबर का उल्लेख है वैसे आवेदन लेना गंभीर चूक के साथ दल विशेष के हस्तक्षेप का प्रमाण है बड़ी संख्या में एक व्यक्ति विशेष के द्वारा आपत्ति किया जाना आपराधिक कृत्य है। ऐसी दशा में पूरी निर्वाचन प्रक्रिया दूषित हो रही है मतदाता के संबंध में गलत जानकारी देकर गंभीर साजिश की गई है।अतः प्रपत्र 7 में घोषणा के प्रावधानुसार गलत जानकारी प्रस्तुत की जाने की दशा में आवेदक/ प्रपत्र 7 पर हस्ताक्षरकर्ता पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (1950 का 43)की धारा की धारा 31 के तहत सीधे कार्यवाही प्रशासन को करना चाहिए है ऐसे फर्जी आवेदको की पहचान आवेदन प्राप्तकर्ता बी एल ओ से या जहां आवेदन दिए है वहा से की जावे ताकि निर्वाचन जैसे कार्य में प्रपत्रों का दुरुपयोग और फर्जीवाड़ा करने वालों को सबक मिल सके।और एस डी एम,तहसीलदार और बी एल ओ को यह बताना चाहिये की नाम कटाने के लिए कौन आवेदन दिया है और किनके किनके नाम है वो बताये !!

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