रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे
महासमुंद। छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन को नई दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित शक्तिपीठ परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के प्रमुख देवी स्थलों का व्यापक विकास एवं कायाकल्प किया जा रहा है। यह पहल न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय मानचित्र पर एक सशक्त धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत मां दंतेश्वरी (दंतेवाड़ा), मां बम्लेश्वरी (डोंगरगढ़), मां चंद्रहासिनी (चंद्रपुर), मां महामाया (रतनपुर) एवं मां सर्वमंगला (कोरबा) जैसे प्रमुख शक्तिपीठों का समग्र विकास किया जा रहा है। इन स्थलों पर मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, यात्री सुविधाओं का विस्तार, पार्किंग व्यवस्था, स्वच्छता प्रबंधन, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, विश्राम स्थल, प्रसाद वितरण केंद्र एवं सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को अधिक सुगम, सुरक्षित और सुखद अनुभव प्राप्त हो सके।
भाजपा जिला मीडिया प्रभारी येतराम साहू ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह योजना केवल धार्मिक आस्था का सम्मान नहीं है, बल्कि प्रदेश के सर्वांगीण विकास का एक सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि शक्तिपीठों के उन्नयन से जहां एक ओर लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। छोटे व्यापारियों, हस्तशिल्पियों, होटल व्यवसाय एवं परिवहन सेवाओं को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्राप्त होगी।
उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, लोक आस्था और धार्मिक महत्व को देश-विदेश तक पहुंचाने में यह योजना मील का पत्थर साबित होगी। बेहतर आधारभूत संरचना और आकर्षक व्यवस्थाओं के कारण प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि होगी, जिससे छत्तीसगढ़ की पहचान एक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में और अधिक सुदृढ़ होगी।
येतराम साहू ने विश्वास जताया कि इस प्रकार की जनहितैषी और दूरदर्शी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा तथा आस्था और आधुनिकता का संतुलित संगम स्थापित करते हुए छत्तीसगढ़ एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरेगा।
