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पोला ग्राम्य जीवनशैली, कृषि व संस्कृति का परिचायक है – योगेश मधुकर

रिपोर्टर कुंज कुमार रात्रे महासमुंद/- शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक माह के तीसरे एवं चौथे शनिवार को बैगलेस डे का आयोजन प्रत्येक स्कूलों में किया जाना है। इसी तारतम्य में संकुल लाफिंन खुर्द महासमुंद अंतर्गत शासकीय उच्च प्राथमिक शाला एवं प्राथमिक शाला चिंगरौद के बच्चों के द्वारा हमारे प्राचीन, पारंपरिक एवं सांस्कृतिक त्योहार पोला पर्व को बड़े ही उत्साह एवं उमंग के साथ मनाया गया।

बच्चों के द्वारा स्वनिर्मित नंदी बैल, भगवान शिव एवं गणेश की मूर्ति तथा चूल्हे-चौके, जाता-पोरा, बेलना-चौंकी बनाकर स्कूल में प्रदर्शन हेतु लाया गया जो आकर्षण का मुख्य केंद्र बिंदु रहा। साथ ही शिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चों ने विधि-विधान पूर्वक पूजा-पाठ करना सीखा।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए मिडिल स्कूल के शिक्षक योगेश कुमार मधुकर ने पोला का संक्षिप्त परिचय देते हुए बच्चों से कहा कि यह पर्व किसानों द्वारा अपने बैलों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है जो उनकी आजीविका का मुख्य आधार है। यह हमारी ग्रामीण जीवनशैली, कृषि संस्कृति और कृतज्ञता की भावना का एक प्रतीक माना जाता है।

प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक दीपक राम सिन्हा ने बताया कि इस पर्व के नाम के पीछे एक पौराणिक कथा है, जो भगवान  कृष्ण की बाल-लीलाओं से जुड़ी है। भगवान कृष्ण ने पोलासुर नामक एक मायावी असुर का वध किया था, जिस दिन यह वध हुआ था, वह दिन भादो माह की अमावस्या का दिन था। पोला पर्व का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि यह पर्व किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वे अपने बैलों की पूजा करते हैं और उनकी कड़ी मेहनत को स्वीकार करते हैं। पोला पर्व ग्रामीण जीवन की एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो कृषि और पशुधन के महत्व को दर्शाता है मिडिल स्कूल के प्रभारी प्रधान पाठक डिगेश कुमार ध्रुव ने कहा की यह पर्व एक खेल उत्सव भी है, जिसके अंतर्गत गांवों में बैल दौड़, बैल सजाने की प्रतियोगिता सहित रस्साकसी, मटका फोड़, पिट्ठू दौड़, गोला फेंक, कबड्डी, फुगड़ी एवं गेड़ी इस पर्व को और भी आकर्षक बनाती हैं।

शिक्षक पोखन लाल चंद्राकर ने कहा कि पोला पर्व में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें
संगीत, नृत्य, नाटक, अभिनय, लोकगीत और लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्य यंत्रों के प्रदर्शन शामिल होते हैं।

प्राथमिक शाला की शिक्षिका सरस्वती गिलहरे ने बच्चों को विभिन्न पकवानों के बारे में बताया जैसे- पोला के लड्डू जो गुड़, घी, गेहूं के आटे से बनाया जाता है। खीर, चावल आटे से बना सोहारी व चिला-रोटी, गुड़ व गेहूं आटे से बना गुलगुला भजिया आदि। उन्होंने बताया कि पोला पर्व के पकवान पारंपरिक और स्वादिष्ट होते हैं, जो पर्व के अवसर पर विशेष महत्व रखते हैं। ये पकवान न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं।

कार्यक्रम के अंत में प्राथमिक शाला की छात्राओं के द्वारा फुगड़ी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। उक्त कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन कोमल राम निषाद ने किया। इस अवसर पर शिक्षिका जागृति जांगड़े, सतबती जांगड़े सहित समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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