संपादक कुंज कुमार रात्रे
महासमुन्द के स्त्रीरोग एवं प्रसूति रोग विभाग के चिकित्सकों ने अपनी उत्कृष्ट दक्षता और सूझबूझ का परिचय देते हुए एक अत्यंत जटिल प्रसवोत्तर मामले में सफल सर्जरी कर महिला की जान बचा ली है।
अस्पताल में एक महिला का सामान्य प्रसव (Normal Vaginal Delivery) हुआ था, जिसके ठीक दूसरे दिन उसके पेट में अत्यधिक सूजन, तेज दर्द और गंभीर एनीमिया (खून की अत्यधिक कमी) की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई। मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए तुरंत अल्ट्रासोनोग्राफी (USG) कराई गई, जिसमें पेट के भीतर अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ (Severe Ascites) जमा होने की बात सामने आई। मरीज की नाजुक हालत और गंभीरता को भांपते हुए स्त्रीरोग विशेषज्ञों ने बिना समय गंवाए तत्काल ‘एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी’ (Exploratory Laparotomy) करने का साहसिक निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की टीम ने जो देखा, वह बेहद हैरान करने वाला था। पेट के भीतर लगभग 30 × 30 सेंटीमीटर के विशाल आकार एवं 6 किलो वजन की एक ओवेरियन सिस्ट (अंडाशय की गांठ) मौजूद थी। चिकित्सकों की कुशल टीम ने बेहद सावधानीपूर्वक इस जटिल गांठ को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।
अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण चिकित्सकीय मामला था। यह घटना इस बात का स्पष्ट संदेश देती है कि प्रसव के बाद पेट में होने वाली असामान्य सूजन, दर्द या किसी भी तरह की असहजता को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्रसवोत्तर काल में समय पर सही जांच और उचित उपचार जीवनरक्षक साबित हो सकते हैं।
इस जटिल और सफल सर्जरी को अंजाम देने वाली चिकित्सा टीम में प्रमुख रूप से ये चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे:
स्त्रीरोग एवं प्रसूति रोग विभाग: डॉ. नेहा ठाकुर, डॉ. प्रतिमा कोशेवारा एवं डॉ. गरिमा सोलंकी।
एनेस्थीसिया विभाग: डॉ. अमितेश एवं डॉ. अजय।
नर्सिंग एवं सहायक स्टाफ: सिस्टर पूजा, सिस्टर तृप्ति तथा अन्य सहायक स्टाफ।